कनिष्क की उपलब्धियों का वर्णन करें।

Q. कनिष्क की उपलब्धियों का वर्णन करें।
 अथवा Q. कुषान शासक कनिष्क के उपलब्धियों और विजयों का वर्णन करें।
Ans- परिचय:-कनिष्क को कुषान वंंश का सबसे   महान एवं प्रतापी शासक माना जाता है , इन्हें राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी श्रेष्ठ माना है। कनिष्क के शासन काल की शुरुआत 78 ईसवी के आसपास मानी जाती है। हालांकि विद्वानों में इनके शासनकाल को लेकर मतभेद है। डॉ. वी . ए . स्मिथ तथा सर जॉन मार्शल के अनुसार वह 120 ईसवी में राजा बना था और 42 वर्षों तक शासन किया था। कुषाण भारत के मूल निवासी नहीं थे लेकिन एक समय इन्होंने भारत पर शासन करते हुए अपने साम्राज्य को पश्चिमी चीन तक विस्तार किया था। कनिष्क अशोक केेे बाद दूसरा महान बौद्ध सम्राट हुआ । 
 
कनिष्क के उपलब्धियां :- चीनी ग्रंथों के अनुसार कुषाण यू-ची जाति की एक शाखा से संबंधित थे। यू-ची जाति चीन के उत्तरी पश्चिमी प्रदेश में निवास करती थी।  इन  पर आक्रमण कर उन्हें वहां से मार भगाया। इस प्रकार कुषाण वंश भारत में अपनी सत्ता को स्थापित किया। कुषाण वंश के शासक कनिष्क एक वीर योद्धा एवं एक कुशल सेनानायक था। उसने अपने सैन्य शक्ति से कश्मीर, मगध, पंजाब  तथा  मथुरा     के शासकों को पराजित  कर अपनी सत्ता को स्थापित किया। इन्होंने चीन केे शक्तिशाली शासकों को हराकर  अपनी सीमा का विस्तार किया था। कुषाणो  शासकों ने शको और पल्लव को हराकर भारत के उत्तरी हिस्सों में एक बड़ेे साम्राज्य की स्थापना की।
•एशिया के इतिहास में कनिष्का को धार्मिक ,साहित्य  और कला के प्रेमी भी माना जाता है। कनिष्का भारत में रहने के बाद बौद्ध धर्म से अत्याधिक प्रभावित हुआ। जिसके बाद इन्होंने बौद्ध धर्म को स्वीकार कर लिया। इन्होंने बौद्ध धर्म का प्रचार- प्रसार पूरे विश्व में कराया इसी कारण से कनिष्क को इतिहास में दूसरा अशोक कहा गया  है , यानी बौद्ध धर्म को मानने वाले दूसरा सबसे बड़ा शासक माना जाता है। जिन्होंने बौद्ध धर्म के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किया। 
 
कनिष्क का शासन व्यवस्था:- कनिष्क कुषान वंश का सबसे प्रतापी शासक होने के कारण ही इन्होंने अनेक प्रदेशों में विजय हासिल किया और अपने साम्राज्य की सीमा को विस्तार किया था। कनिष्क के राज्यों का सीमा की निर्धारण लेखो तथा सिक्को के आधार पर किया गया है। उसका साम्राज्य उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में विंध्यापर्वत  तक तथा उत्तरी अफ़गानिस्तान से लेकर पूर्व में उत्तर प्रदेश एवं बिहार तक फैला हुआ था।
• इस विशाल साम्राज्य की राजधानी पुरुषपुर था , इनके शासन व्यवस्था के बारे में बहुत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है फिर भी यह माना जाता है कि कनिष्क देवी उत्पत्ति पर विश्वास रखते थे। यह अपने आपको देवी- देवताओं का वंशज मानते थे इसके बारे में हमें प्रयाग लेख से जानकारी प्राप्त होती है। यह अपने साम्राज्य को प्रांतों तथा ग्रामीणों में बांटा हुआ था इस प्रांतों तथा ग्रामीणों में नियंत्रण के लिए विदेशी अधिकारियों को रखता था ताकि क्षेत्रों में नियंत्रण बनाए रखा जा सके। जिसका उल्लेख मथुरा लेख से प्राप्त होता है। ग्रामीक का मुख्य कार्य राजस्व को वसूली करके केंद्रीय कोष में जमा कराना होता था। इनका शासन व्यवस्था सैन्य शक्ति पर आधारित था।
बौद्ध धर्म का महान  प्रचारक :
कनिष्क के शासनकाल की सबसे प्रसिद्ध घटना यह है कि इन्होंने बौद्ध धर्म को स्वीकार कर लिया। कनिष्क अपने शासनकाल के शुरुआती दौर में लोगों के प्रति हिंसा की नीति को अपनाया। लेकिन वह अश्वघोष से  प्रभावित होकर बौद्ध धर्म को स्वीकार कर लिया उसके बाद अहिंसा  के रास्ते को अपना लिया । कनिष्क  के शासन काल के दौरान ही  बौद्ध धर्म का दो गुटों में विभाजन  हो गया  । कनिष्क आरम्भ में बौद्ध धर्म का अनुयायी नहीं था। उसके आरंभिक सिक्कों पर सूर्य और अग्नि के चित्र थे।

 

• इनसे उसका पारसी धर्म के अनुयायी होने का अनुमान लगाया जाता है। बाद में उसके सिक्कों पर हिन्दू देवताओं के चित्र अंकित थे। परन्तु अश्वघोष के प्रभाव में आकर उसने  बौद्ध धर्म को स्वीकार किया। उसके काल में बौद्ध धर्म दो शाखाओं में बंट गया जिन्हें हीनयान और महायान के नाम सेेे जाना जाता है। कनिष्क ने महायान शाखा को अपनाया। उसने इसके प्रचार के लिए निम्नलिखित कार्य किए।
(i) कनिष्क ने विदेशों में  महायान शाखा के प्रचार प्रसार के लिए अपने अनुयायियों को भेजे, जिसके फलस्वरूप बौद्ध धर्म मध्य एशिया, चीन, जापान आदि देशों में फैल गया।

 

(ii) कनिष्क ने बुद्ध् की प्रतिमा को देश के विभिन्न भागों में स्थापित करवाई, जिसके कारण जनता में महात्मा बुद्ध के प्रति श्रद्रा बढ़ी।

 

(iii) उसने कश्मीर में चौथी बौद्ध सभा का आयोजन किया। वसुमित्र इस सभा का अध्यक्ष और अश्वघोष उपाध्यक्ष था। यहाँ बौद्ध् धर्म के नियमों को सरल बनाया गया। इन नियमों को ‘महाविभाषा’ नामक ग्रन्थ में संकलित किया गया। इस ग्रन्थ को महायान बौद्ध धर्म का शब्दकोश अथवा ‘महाकोश’ भी कहा जाता है। इन नियमों को ताम्रपत्रों पर लिखकर सन्दूरकों में बन्द किया गया।

 

(iv) अशोक की तरह कनिष्क ने भी बौद्ध भिक्षुओं को सहायता के रूप में बहुत-सा धन दिया। भिक्षुओं ने बौद्ध  धर्म के प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

 

(v) कनिष्क ने बौद्ध भिक्षुओं के लिए मठों एवं विहारों का निर्माण करवाया और बौद्ध पूजा गूहों की भी स्थापना की।

 

(vi) बौद्ध धर्म में सुधार करके उसे सरल बनाया गया। भिक्षुओं को कठोर जीवन पसन्द नहीं था। अतः महायान शाखा का प्रचलन आरम्भ हुआ। इस नई शाखा ने संस्कृत भाषा को अपनाया और बुद्ध की मूर्तियाँ बनाकर उसकी पूजा आरम्भ कर दी। 
 
कनिष्क द्वारा बौद्ध  धर्म के निर्माण कार्य :-कनिष्क बौद्ध धर्म के महान प्रचारक होने के साथ-साथ एक महान निर्माता भी था। उसने अनेक नगर तथा शानदार भवनों का निर्माण कराया। कनिष्क ने अपने राजधानी पुरुषपुर को अनेक इमारतों से सजाया। उसने भगवान् बुद्ध के स्मारक के रूप में 600 फीट ऊँची एक बुर्ज का निर्माण करवाया। इस बुर्ज की 14 मंज़िलें थीं। इस बुर्ज का शिखर लोहे का था। इस बुर्ज के चारों ओर बुद्ध की अनेक मूर्तियाँ बनवाई गई। इसके अतिरिक्त कनिष्क ने सिरकप नामक स्थान पर एक नगर तथा पुरुषपुर एवं कनिष्कपुर नामक नगर की भी स्थापना की थी। इतना ही नहीं उसने पेशावर, तक्षशिला तथा मथुरा को बागों तथा सड़कों से सजाया ।
 
 कला का संरक्षक :
कनिष्क के काल में कला की सुन्दर शैलियों का  विकास हुआ। इस काल में गान्धार-कला शैली में कुशल मूर्तिकारों ने बुद्ध के जीवन से सम्बन्धित दृश्यों को मूर्तियों के रूप में प्रस्तुत किया। उनके द्वारा बनाई गई कई मूर्तियों में कुछ एक दृश्य, उदाहरण के लिए महात्मा बुद्ध का गृह-परित्याग, ज्ञान-प्राप्ति, घोर तपस्या, मृत्यु आदि इतने सुन्दर तथा मनोहर थे कि कोई भी व्यक्ति उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता था। 
• कनिष्क के शासनकाल में मूर्ति-निर्माण तथा स्थापत्य कला का चार भिन्र-भिन्र केन्द्रों सारनाथ, मथुरा, अमरावती तथा गान्धार में समुचित विकास हुआ। इनमें से प्रत्येक की एक अलग शैली थी जो एक-दूसरे से प्रभावित थी। सारनाथ तथा मथुरा से प्राप्त मूर्तियों की निर्माण-कला में कुछ समानता पाई जाती है।

 

Most important objective question
 
Q1. कनिष्क किस वंश का था।
Ans- कुषान
Q2. कुषान वंश की राजधानी कहां थी।
Ans-पुरूषपुर (पेशावर)
 
Q3. प्रथम बौद्ध संगीति किसके नेतृत्व में हुआ था।
Ans- सम्राट अजातशत्रु
 
Q4. प्रथम बौद्ध संगीति किसके अध्यक्षता में हुई थी।
Ans-महाकश्यप
 
Q5. प्रथम बौद्ध संगीति कहां और कब हुई थी।
Ans-483 ई.पू. में ‘राजगृह’ (आधुनिक राजगिरि), 
 
Q6. द्वितीय बौद्ध संगीति कब और  कहां हुई थी।
Ans- 383ईसा पूर्व वैशाली में 
 
Q7. द्वितीय बौद्ध संगीति किसके  शासनकाल में हुआ था।
Ans- कालाशोक के शासनकाल में 
 
Q8. चतुर्थ बौद्ध संगीति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष कौन थे।
Ans-अध्यक्ष- वसुमित्र
         उपाध्यक्ष- अश्वघोष
Q10. चतुर्थ बौद्ध संगीति कहां हुई थी।
Ans-कश्मीर ( कुण्डलवन )
 
Q 11.चतुर्थ बौद्ध संगीति किस राजा के संरक्षण में हुई थी।
Ans- कुषाण राजा कनिष्क के संरक्षण में 
 
Q12.चतुर्थ बौद्ध संगीति कब आयोजित हुआ था।
Ans- 72 ईस्वी में 
 

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