गुप्तों के शासन प्रबंध पर एक निबंध लिखें।

Q. गुप्तों के शासन प्रबंध पर एक निबंध लिखें।

 

 अथवा Q. गुप्त प्रशासन पर एक निबंध लिखें। 

 

Ans- परिचय :-  गुप्त साम्राज्य की नींव श्री गुप्त ने रखी थी, यह  एक सामंत थे। इस साम्राज्य के वास्तविक संस्थापक चंद्रगुप्त प्रथम था। जिसने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की थी। जिसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी।इस वंश में समुद्रगुप्त तथा चंद्रगुप्त द्वितीय जैसे कई योग्य एवं शक्तिशाली शासक हुए। गुप्तों के काल को भारतीय इतिहास में स्वर्ण युग कहा गया है । गुप्तों के शासन व्यवस्था के बारेे में हमें अभिलेखों एवंं साहित्य स्रोतों सेे जानकारी मिलती है।
 
गुप्तों  के शासन व्यवस्था:-गुप्त साम्राज्य की शासन व्यवस्था राजतंत्रात्मक  थी। गुप्त वंश देवी उत्पत्ति पर विश्वास रखते थे, ये लोग महाराजाधिराज, परमेश्वर इत्यादि की उपाधि धारण करते थे । गुप्त साम्राज्य पूर्वी समुद्र से पश्चिमी समुद्र तक तथा हिमालय से नर्मदा नदी तक विस्तृत था।इस विशाल साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र था। इस समय राज्य का प्रमुख व्यक्ति सम्राट को माना जाता था।
• सभी प्रकार के निर्णय सम्राट ही देते थे और यह निर्णय अंतिम निर्णय होता था। इस साम्राज्य में एक सेनापति होता था ,जो राजा के बताए अनुसार कार्य करता था। गुप्तों के बारे में यह कहा जाता है कि यहां पर रानियों का भी महत्व था, जिसके कारण अपने पति के साथ मिलकर शासन व्यवस्था को भी चलाती थी। उदाहरण के तौर पर कुमार देवी ने अपने पति चंद्रगुप्त प्रथम के साथ मिलकर शासन व्यवस्था को चलाती थी। 
• इस समय चीनी यात्री फाहियान ने गुप्तों के शासन व्यवस्था के बारे में प्रशंसा की है उन्होंने यह कहा है कि भारत में गुप्त साम्राज्य में जनता को किसी अपराध पर कठोर दंड नहीं दिया जाता था। फाह्यान का यह भी कहना था की गुप्त काल में किसी अपराध के लिए मृत्युदंड नहीं दिया जाता था। गुप्त साम्राज्य का शासन व्यवस्था अच्छे ढंग से चलाने के लिए कई प्रकार के व्यवस्थाएं की गई थी, जैसे कि- मंत्री परिषद, सैन्य संगठन ,प्रांतीय प्रशासन व्यवस्था, नगर प्रशासन ,ग्राम प्रशासन ,पुलिस विभाग इत्यादि। 
 
1. मंत्री परिषद:-  गुप्त काल में मंत्रिपरिषद की नियुक्ति राजा द्वारा स्वयं किया जाता था। मंत्री राजा के किसी भी कार्य के लिए निर्णय लेने में सहायता करता था। एक दरबार में कई मंत्रियां होती थी, जो अलग-अलग कार्यों को देख रेख करता था। मंत्री राजा के दरबार में पैतृक था ,यानी मंत्री का मृत्यु होने के बाद उनके पुत्र ही मंत्री बनते थे। समुद्रगुप्त के मंत्री हरिषेन तथा पृथ्वीषेन कुमारगुप्त  का मंत्री था।
 
2. सैन्य संगठन:-गुप्तों के पास एक विशाल सैन्य संगठन था, जिसके कारण ही विशाल साम्राज्य की स्थापना कर पाए थे। सम्राट सेना का सर्वोच्च अधिकारी होता था उनके नेतृत्व में ही सैनिकों द्वारा किसी भी राज्य पर आक्रमण किया जाता था और उन राज्य पर अपना अधिकार प्राप्त करता था। गुप्तों के पास तीन प्रकार की सैनिक थे जैसे कि-घुड़सवार सैनिक, हाथी सैनिक तथा पैदल सैनिक। राजा का सर्वोच्च अधिकारी सेनापति होता था। गुप्ता द्वारा सेना के रूप में रथ का प्रयोग भी किया जाता था, लेकिन सबसे विशेष सेना अस्वरोही को माना जाता था। गुप्तों के काल में नौ -सेना की व्यवस्था भी उपलब्ध थी,  यानी कि ये लोग युद्ध के समय नौ प्रकार के हथियारों का प्रयोग करते थे। गुप्तों के पास एक शक्तिशाली एवं विशाल सेना होने के कारण ही अपने साम्राज्य को बड़े स्तर पर विस्तृत कर पाया था। 
 
3. प्रांतीय प्रशासन व्यवस्था:-गुप्त साम्राज्य अत्यंत विशाल था, जिसके कारण राजा के राजधानी में रहते हुए पूरे साम्राज्य पर नियंत्रण रखना असंभव था। जिसके कारण सभी प्रांतों में देख -रेख के लिए अपने मंत्रियों को रखा था ,ताकि उन क्षेत्रों में नियंत्रण रख सके। इसीलिए अपने साम्राज्य को कई प्रांतों में बांटा गया था, ताकि आसानी से शासन व्यवस्था को चलाया जा सके।
 
4. नगर प्रशासन :-नगर प्रशासन में राजा के अपने अधिकारी होते थे ,या राजा के ही साम्राज्य के व्यक्ति होते थे। यानी राजा के वंश का ही कोई व्यक्ति होता था, जिन्हें नगर का कर्मचारी बना दिया जाता था, ताकि इन क्षेत्रों में देख-रेख कर सकें और इन क्षेत्रों के होने वाले राजस्व को जमा करा सकें। 
 
5.ग्राम प्रशासन व्यवस्था:-ग्राम प्रशासन को भी चलाने के लिए कई भागों में विभक्त किया गया था, यानी की बांटा गया था। जो राजा के कोई खास आदमी होते थे ,और उनका कहना ग्राम के सभी लोग मानते थे उन्हें देखरेख की जिम्मेदारी दी जाती थी। यानी कि ग्राम के सभी प्रकार के देख-रेख की जिम्मेदारी मुखिया को दिया जाता था।
 
6. पुलिस विभाग:- गुप्त काल में पुलिस विभाग की भी व्यवस्था की गई थी। पुलिस विभाग का व्यवस्था इसलिए किया गया था, ताकि साम्राज्य के आंतरिक शांति एवं सुरक्षा को बनाए रखा जा सके। गुतों के पुलिस विभाग रात में भी पहरा देता था ताकि चोरी या लूटपाट ना हो। चीनी यात्री फाह्यान गुप्तों के शासनकाल के दौरान भारत आया था ,उन्होंने कई मीलों तक यात्रा किया था। फाहियान ने बताया कि उन्हें कभी भी चोरी या लूटपाट का डर नहीं था। उन्होंने गुप्ता से प्रशासन का प्रशंसा किया है कि यहां पर चोरी या डकैती का बिल्कुल भी डर नहीं था।
 
7. गुप्ता के आय-व्यय का साधन :-गुप्तों के आय का प्रमुख साधन भूमि कर (टैक्स) था। यहां पर राजा द्वारा जनता को कुछ भूमि दिया जाता था जिसमें जनता कृषि करते थे और उस कृषि के बदले राजा को टैक्स देना पड़ता था। जिन्हें भूमि का राजस्व कहा जाता था, उस समय राजा द्वारा जनता से भूमि के बदले कुल कृषि के उपज का 1/6 भाग  टैक्स लेता था।

 

Q. गुप्त साम्राज्य के पतन के कारणों का वर्णन करें।
अथवा  Q. गुप्त साम्राज्य इतना अधिक समृद्ध था, फिर भी गुप्त साम्राज्य का पतन क्यों हुआ कारण को  बताएं।

 

Ans- परिचय :- गुप्त साम्राज्य की नींव श्री गुप्त ने रखी थी, यह  एक सामंत थे। इस साम्राज्य के वास्तविक संस्थापक चंद्रगुप्त प्रथम था।जिसने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की थी। जिसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी।इस वंश में समुद्रगुप्त तथा चंद्रगुप्त द्वितीय जैसे कई योग्य एवं शक्तिशाली शासक हुए। गुप्तों के काल को भारतीय इतिहास में स्वर्ण युग कहा गया है फिर भी गुप्त साम्राज्य का पतन कैसे हुआ। गुप्त साम्राज्य के पतन होने के कई कारण थे जैसे कि अयोग्य उत्तराधिकारी का होना, विदेशी आक्रमण ,प्रशासनिक कमजोरियां ,आर्थिक कारण ,धार्मिक कारण ,सामंतों का विद्रोह इत्यादि ।

 

.आयोग उत्तराधिकारी का होना –  aayog uttradhikari ka hona
   गुप्त साम्राज्य के विस्तार में समुद्रगुप्त और चंद्रगुप्त द्वितीय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। समुद्रगुप्त के बारे में कहा जाता है की इनके घोड़े ने तीन समुद्र का पानी पिया है इसका अर्थ यह है कि इनका साम्राज्य भारत के अधिकतर भागों पर स्थापित था।  गुप्त साम्राज्य में स्कंद गुप्त के शासनकाल तक स्थिति ठीक थी। स्कंद गुप्त के मृत्यु हो जाने के बाद गुप्त वंश में कोई ऐसा शासक नहीं हुआ। जो साम्राज्य की एकता को एक सूत्र में बांध कर रखा जा सके । इस प्रकार गुप्तों के अयोग्य उत्तराधिकारी के कारण पतन माना जाता है।

 

2.विदेशी आक्रमण – videshi aakraman: 
गुप्त साम्राज्य के पतन होने का एक प्रमुख कारण विदेशी आक्रमण को भी माना जाता है। गुप्तों पर विदेशी ने सम्राट को विशेष क्षति पहुंचाया।गुप्त साम्राज्य को पुष्यमित्र एवं हूणों केआक्रमण का सामना करना पड़ा। प्रत्येक विदेशी आंतरिक आक्रमण ने साम्राज्य की स्थिति को अत्यंत दयनीय बना दिया। गुप्त साम्राज्य पर पहला आक्रमण कुमारगुप्त प्रथम केेे शासनकाल में पुष्यमित्र ने कियाा था। पुष्यमित्र के इस आक्रमण से विदेशी आक्रमणकारी का मार्ग हमेशा के लिए खोल दिया। पुष्यमित्र  केेे आक्रमण से ज्यादा घातक हूणों का आक्रमण था। यह माना जाता है कि स्कंदगुप्त को  हूणों  के आक्रमण का सामना करना पड़ा था।
 • जिसमें स्कंदगुप्त ने   ही  विजय प्राप्त  किया।  लेकिन जब स्कंद का मृत्युु हो जाता है उसके बाद दोबारा विदेशी आक्रमण होने आरंभ  जाते हैं । गुप्तों केेेे आयोग उत्तराधिकारी आने के कारण विदेशी आक्रमण का सामन नहीं कर पाता जिसकेे कारण गुप्त साम्राज्य का पतन हो जाता है। 

 

3.आर्थिक कारण – arthik Karan:
 गुप्त साम्राज्य केेेेे पतन के कुछ आर्थिक कारण भी थे। गुप्त काल में पहलेेेे से ही भूमि दान देने की प्रथाचलती आ रह थी। गुप्तो द्वारा दान में दिये गये भूमि पर किसी भी प्रकार का कर (टैक्स) नहीं लिया जाता था। साथ ही जिन व्यक्ति को भूमि दान में दिया जाता था। उन पर राजा का अधिकार ना होकर उस व्यक्ति का अधिकार प्राप्त हो जाता था। इसके अतिरिक्त नए भूमि  अनुदान के मालिको को राजा कुछ प्रशासनिक अधिकार सौंप दिये थे। इससे यह हुआ कि एक तरफ राजा की शक्ति दिन प्रतिदिन कम होता चला गया, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक व्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ा।

10 most important objective question

Q1.किस शासक ने हूणों के आक्रमण को रोका था ?

Ans -स्कन्द गुप्त 

Q 2.गुप्त काल में पहली बार किस शासक ने चांदी (रजत) मुद्राओं को प्रचलन में लाया ?

Ans -चन्द्रगुप्त प्रथम

Q 3.बल विवाह की प्रथा कब प्रारम्भ हुआ ?

Ans- गुप्तकाल में 

Q 4.किस गुप्त कालीन शासक को कविराज कहा गया है ?

Ans – समुद्रगुप्त

Q 5.गुप्त वंश के किस शासक ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण  की थी ?

Ans- चन्द्रगुप्त द्वितीय

Q 6. गुप्त काल में स्वर्ण मुद्रा की किस नाम से जाना जाता था ?

Ans – दीनार

Q 7.कवी कालिदास किसके राजकवि थे?

Ans-चन्द्रगुप्त II 

Q 8.गुप्त शासन के दौरान निम्नलिखित में से ऐसा व्यक्ति कौन था, जो एक महान खगोलविज्ञानी तथा गणितज्ञ था?

Ans- आर्यभट

Q9.उत्तर-गुप्त युग में जो विश्वविद्यालय प्रसिद्ध हुआ, वह था।

Ans-नालंदा

Q10.प्रयाग प्रशस्ति अभिलेख का लेखक हरिषेण किस शासक का दरबारी कवि था ?

(a) समुद्रगुप्त

 

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