बक्सर युद्ध के कारणों एवं परिणामों

Q.बक्सर युद्ध के कारणों एवं   परिणामों का वर्णन करें।
  अथवा Q. बक्सर युद्ध के कारणों एवं महत्व की विवेचना करें।
Ans-परिचय:बक्सर का युद्ध 22 अक्टूबर 1764 में बक्सर के मैदान में लड़ा गया था। यह युद्ध  ईस्ट इंडिया कंपनी के हैक्टर मुनरो और मुगल तथा नवाबों की सेनाओं के बीच लड़ा गया था। एक ओर बंगाल के नबाब मीर कासिम, अवध के नबाब शुजाउद्दौला, तथा मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय की सेनाएं थी तथा दूसरी ओर अंग्रेज कम्पनी  की सेना लड़ रही थी। इस युद्ध में अंग्रेजों की जीत हुई , जिसके परिणाम स्वरूप बंगाल, बिहार, तथा उड़ीसा का दीवानी और राजस्व अधिकार अंग्रेज कम्पनी के हाथ चला गया। इस युद्ध में अंग्रेजो के   लगभग 847 सैनिक  तथा दूसरे पक्ष के लगभग 2000 सैनिक मारे गए । मीरकासिम को युद्ध के मैदान से भागना पड़ा। 12 वर्ष इधर-उधर भटकने के बाद 1777 ई. में उसकी मृत्यु हो गई। 
 
बक्सर युद्ध के कारण: 
अंग्रेजों के द्वारा प्लासी का युद्ध जीतने के बाद मीर ज़ाफर को 1757 में बंगाल का नवाब बना दिया जाता है।  अंग्रेजों ने प्लासी का युद्ध मीर ज़ाफर को नवाब बनाने के लिए नहीं बल्कि अपने स्वार्थ के लिए लड़ा था, इसलिए मीर ज़ाफर अंग्रेजों का मात्र एक कठपुतली नवाब के रूप में कार्य कर रहा था यानी की मीर जाफर सिर्फ नाम का शासक था ।  बंगाल की सत्ता वास्तविक रूप से  अंग्रेज ही चला रहे थे। धीरे-धीरे अंग्रेजों का स्वार्थ और ज्यादा बढ़ने लगा था परंतु मीर ज़ाफर के रहते हुए वह पूरा नहीं हो पा रहा था। 

 

• कुछ समय बाद  मीर ज़ाफर का दामाद मीर कासिम बंगाल की सत्ता को प्राप्त करने की इच्छा होती है जिसके बाद उन्होंने अंग्रेजों से बात करता है की अगर वे उसे बंगाल का नवाब बना देता हैं ,तो वह उन्हें मीर जाफर से भी अधिक उनको कार्य करने की स्वतंत्रता देगा। अंग्रेजों ने यह प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और 1760 में मीर ज़ाफर को हटाकर अंग्रेजो ने मीर कासिम को बंगाल का नवाब बना दिया । परंतु  अंग्रेजों ने जैसा सोचा था की मीर कासिम को नवाब बनाने के बाद उनका कार्य और ज्यादा आसान हो जाएगा वैसा कुछ भी नहीं हुआ, मीर कासिम ने अंग्रेजों से जैसा वादा किया था उसने उसके विपरीत ही अपने कार्यों को किया।

 

• अंग्रेजों की इच्छा थी की मीर कासिम भी मीर ज़ाफर की तरह ही उनकी कठपुतली की तरह कार्य करेगा, लेकिन मीर कासिम एक योग्य नवाब था।  जिसके कारण उसने अंग्रेजों के बताए हुए कार्य को ना करके अपनी स्थिति को मजबूत बनाने का प्रयास किया। जब मीर कासिम ने अंग्रेजों के बताये अनुसार कार्य नहीं किया तो अंग्रेजों ने उन्हें पद से हटाने का सोचा और उन्होंने 1763 ईस्वी में मीर कासिम के स्थान पर पुनः मीर जाफर को नवाब बनाया। इसके बाद मीर कासिम और अंग्रेजों के बीच अनेक स्थानों पर झड़प होती रही।

 

• 1763 ईस्वी में ही पटना में हुए एक हत्याकांड में मीर कासिम ने अनेक अंग्रेजों को मौत के घाट उतार दिया था। जिसके कारण अंग्रेजों ने मीर कासिम से बदला लेने के लिए उन्हें ढूंढने लगा। इस समय मीर कासिम अवध के नवाब शुजाउद्दौला के पास शरण लिया हुआ था और यहां से  ही उन्होंने शुजाउद्दौला और तत्कालीन मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध  लड़ने का निश्चय किया।
 
बक्सर युद्ध के निम्न कारण थे:-
1.मीर कासिम को नवाब के पद से हटाना:- अंग्रेजों ने मीर कासिम को नवाब बना दिया था। अंग्रेज चाहते थे कि यदि अयोग्य व्यक्ति  नवाब बनेगा तो उनके नियंत्रण मे रहेगा और उनके बताये अनुसार कार्य  करेगा, लेकिन ऐसा नही हुआ मीर कासिम योग्य निकला। अतः अंग्रेजों ने मीर कासिम को भी पद से  हटाने का निश्चय किया
 
2. अंग्रेजो का अवैध व्यापार पर नियंत्रण:-  अंग्रेज कंपनी के भ्रष्ट कर्मचारी अवैध व्यापार मे लगे थे। अपने नाम से वह देशी व्यापारियों का वस्तुएं बिना टैक्स के भेजने लगे थे। प्रत्येक चौकी पर अंग्रेज भारतीयों की नाव को रोककर उनसे रिश्वत मांगते थे। अंग्रेजों ने बिना अनुमति के  कारखाने, सैनिकों तथा किलों की संख्या बढ़ाती जा रही थी। मीर कासिम ने यह सब रोकने के लिये कहा लेकिन अंग्रेजों ने उस की बात नही मानी। अतः मीर कासिम ने पहले अवैध व्यापार को रोकने के लिये कंपनी से बात की। 
• परन्तु अंग्रेज कंपनी ने अवैध व्यापार को नहीं रोका ।  ऐसे में मीर कासिम को अंग्रेजों की मनमानी बर्दाश्त नहीं हुआ, इसीलिए उनका विरोध करना आरंभ कर दिया। अंग्रेजों को मीर कासिम द्वारा उनका विरोध करना अच्छा नहीं लगा अतः अंग्रेजों ने उसे नवाब के पद से हटा दिया और उसकेेे स्थान  पुुनः मीर जाफर को नवाब बनाया गया। नवाब के पद से हटाए जाने के बाद मीर कासिम का  गुस्सा और अधिक बढ़ गया। वह अंग्रेजों का कट्टर शत्रु बन गया और उनके विरुद्ध युद्ध करने का दृढ़ निश्चय कर लिया। 
 
3.मीर कासिम के द्वारा अंग्रेज बंदियों की हत्या:- अंग्रेजों ने मीर कासिम सेनाओं को मुर्शिदाबाद, मुंगेर आदि स्थान में पराजित कर दिया। इसके बाद मीर कासिम अपनी प्राण की रक्षा के लिए पटना की ओर भाग गया। इसी बीच हार से क्रोधित होकर मीर कासिम ने 1763 मे  पटना से भागते समय लगभग 200 अंग्रेज बंदियों की हत्या करवा दी थी। इस हत्याकांड में अंग्रेजों का क्रोध भड़क गया ,अत: वे मीर कासिम को सबक सिखाना चाहते थे
 
 4.बक्सर के युद्ध की घटना:- अंग्रेजों के द्वारा  मीर कासिम को नवाब के पद से हटा कर दुबारा मीर ज़ाफर को बंगाल का नवाब बना दिया जाता है। जिसके बाद मीर कासिम दुबारा बंगाल की सत्ता को पाने और अंग्रेजों से बदला लेने के लिए योजना बनाता है। इसी समय  मिर कासिम  मदद मांगने के लिए अवध के नवाब शुजाउद्दौला के पास जाता है जहां पर मुग़ल शासक शाह आलम द्वितीय भी मौजूद रहता हैं, इस  समय मुगल शासक शाह आलम द्वितीय दिल्ली में शासन कर रहे थे । 
• इन दोनों ने मीर कासिम की मदद के लिए तैयार हो गया। जिसके बाद तीनों ने मिलकर अंग्रेजों से सामना करने के लिए संधि होती है। इसी बीच अंग्रेज भी बिहार के बक्सर नामक क्षेत्र  में पहुँच जात हैं। जिसके बाद 22 अक्टूबर 1764 में बिहार के बक्सर नामक क्षेत्र में “बक्सर का युद्ध” होता है।  इस युद्ध में अंग्रेजों ने इन तीनों को पराजित कर दिया था और इस युद्ध के बाद यह भी तय हो गया था की अब अंग्रेज ही भारत में अपनी शासन करेगा । क्यूंकि जिन तीनों को अंग्रेजों ने बक्सर के युद्ध में हराया था, इस युद्ध से पहले इन तीनों की ही लगभग पूरे भारत में सत्ता स्थापित था।
• इस युद्ध के बाद अंग्रेजों की शक्ति भारत में बहुत अधिक बढ़ गई थी।इस बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों की तरफ से हेक्टर मुनरो ने अंग्रेज सेना का नेतृत्व किया था । यह कहा जाता है की बक्सर के युद्ध में जीत के बाद अंग्रेजों ने दोबारा रॉबर्ट क्लाइव को बंगाल का गवर्नर बनाया। 
 
बक्सर युद्ध के परिणाम  या  महत्व:-बक्सर युद्ध के परिणाम स्वरूप शुजाउद्दौला तथा सम्राट शाहआलम द्वितीय को विवश होकर इलाहाबाद की संधि करनी पड़ी। इलाहाबाद की संधि की निम्न शर्तें थी–
1. शुजाउद्दौला से  इलाहाबाद छीनकर अवध प्रदेश उसे लौटा दिया गया।
2. अंग्रेजों को शुजाउद्दौला ने  युद्ध के  क्षतिपूर्ति के लिए 50 लाख रूपये देना स्वीकार कर लिया ।
3. अंग्रेजों ने अवध को उसके व्यय पर सैनिक सहायता देना  के लिए स्वीकार किया।
4. अंग्रेजों को नवाब ने बिना कर ( टैक्स )दिए अवध मे व्यापार करने की छूट दी गई।
5. अंग्रेजों ने अवध के नवाब से इलाहाबाद के जिले को लेकर मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय को दिया गया।
6. मुगल सम्राट को अंग्रेजों ने 26 लाख रूपये वार्षिक पेंशन देना स्वीकार किया।
7. मुगल सम्राट ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी अंग्रेजों को सौंप दी अब इन क्षेत्रों में  वे लगान वसूल कर सकते थे।
 
द्वैध शासन प्रणाली:जब अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी ने मीर कासिम को हटाकर मीर ज़ाफर को दुबारा 1763 में बंगाल का नवाब बनाया था उसके बाद वह 1765 तक नवाब बना रहता है जिसके बाद  उसकी 1765 में मृत्यु हो जाती है। बक्सर के युद्ध में जीत के बाद अंग्रेजों की इच्छाएं और ज्यादा बढ़ने लगती है और वे बंगाल से अपना पूरा फायदा लेने के बारे में सोचता हैं और इसलिए रॉबर्ट क्लाइव द्वारा बंगाल में 1765 में “द्वैध शासन प्रणाली” को लागू कर दिया जाता है।
• इस द्वैध शासन प्रणाली में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी कार्यों का सारा बोझ बंगाल के नवाब के ऊपर ड़ाल देती है और राजस्व के सारे अधिकार अपने पास रख लेती है जैसे टैक्स वसूलना और व्यापार करना। इस कारण सारी प्रशासन संबंधी जिम्मेदारियां नवाब को करनी होती थी और अंग्रेजी कंपनी सिर्फ अपना पैसों का भंडार भरने में लगी थी, जिस कारण कुछ समय बाद बंगाल  को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया । 
Most important objective question
Q1. बक्सर का युद्ध कब लड़ा गया था।
Ans- 23 अक्टूबर 1764
Q2. बक्सर का युद्ध किनके- किनके बीच लड़ा गया था।
Ans-अंग्रेज और मीर कासिम  , शुजाउद्दौला ,शाह आलम द्वितीय
Q3. बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों सेना का  नेतृत्व कोन कर रहा  था।
Ans- हेक्टर मुनरो
Q4. सम्राट शाह  आलम द्वितीय ने बंगाल उड़ीसा और बिहार की दीवानी कब अंग्रेजों को सौंपी।
Ans-12 अगस्त 1765
Q5. मीर कासिम की मृत्यु किस वर्ष में हुई थी।
Ans-8 मई 1777
Q6.  ईस्ट इंडिया कंपनी बंगाल की दीवानी कब प्राप्त की
Ans- 12 अगस्त 1765
Q7. मीर कासिम बंगाल का नवाब कब बना था।
Ans-1760 AD
 
Q8. वारेन हेस्टिंग्स बंगाल का गवर्नर कब बना था।
Ans-1773 AD
Q9. क्लाइव बंगाल की  गवर्नर कब बना था ।
Ans- 1757 AD
 

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